उत्तर प्रदेश के T20 स्पेसलिस्ट "सुरेश रैना" किस प्रकार अपने कैरियर में सफल हुए आइए जानते हैं। उनके जीवन की कुछ अनसुनी बातों के बारे में "सुरेश रैना" मध्यक्रम के बल्लेबाज और बाएं हाथ के ऑफ स्पिनर भी हैं। टीम इंडिया तक पहुंचने का उन का सफर कैसा रहा आइए जानते हैं। लखनऊ के स्पोर्ट्स हॉस्टल से टीम इंडिया का हिस्सा बनने के लिए सुरेश रैना ने कड़ी मेहनत और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार उनके साथ ऐसा हुआ कि वह हिम्मत हारे मन में खुदकुशी करने तक का ख्याल आया। लेकिन रैना ने जो क्रिकेटर बनने का सपना देखा था उसे लेकर वह लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेश रैना के जीवन के जुड़े हुए कई ऐसे राज हैं जिन्हें जानकर आप को रोना आ जाएगा। रैना के संघर्ष की कहानी इतनी कठिन थी।कि उन्होंने कई बार खुद खुशी करने तक के बारे में सोच लिया था। रैना की जिंदगी में ऐसे बहुत से मोड़ आए जब उनकी हिम्मत में जवाब दे दिया। रैना के अनुसार + 13 साल के थे तो एक क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने के लिए आगरा जा रहे थे। उन्हें अखबार बिछाकर सोना पड़ा थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा एक लड़का उनके चेहरे के पास पेशाब कर रहा है। अगला स्टेशन आते ही उन्होंने धक्का देकर उसे नीचे कर दिया।
सुरेश रैना की क्रिकेट की शैली को देखते हुए कोच के फेवरेट माने जाते थे। जिसकी वजह से Sports और हॉस्टल के लड़के उनसे जलते रहते थे। कई बार कोई उनकी दूध की बाल्टी में घास डाल देता तो कोई सर्दियों में उनके ऊपर ठंडा पानी उड़ेल देता। हॉस्टल में दोस्तों ने खूब परेशान किया करते थे जिसके कारण उन्होंने एक बार हॉस्टल छोड़ने का मन भी बना लिया था। हॉस्टल के लड़के रहना को इतना परेशान किया करते थे कि लड़कों ने एक बार रहना और उनके दोस्तों की झांकी से पिटाई की इस घटना के बाद एक दोस्त कोमा में चला गया जबकि दूसरे दोस्त ने छत से छलांग लगाने की कोशिश की।
इसके अलावा सुरेश रैना ने बहुत करीब ही के दिन देखें उनके घर ₹200 का मन नहीं आ रहा था था। गांव में खेलते समय उन्हें 45 छक्के मारने के लिए ₹200 मिलते थे। 1999 में सुरेश रैना एयर इंडिया की तरफ से खेलने का मौका मिला 2003 में उन्होंने इंग्लैंड क्लब की तरफ से खेला। इसके बाद सुरेश रैना की मेहनत रंग लाई और 2005 में टीम इंडिया के लिए चुना गया


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