बच्चों का फर्ज
बहुत गुस्से वाला था वह … पिताजी हमेशा समझाते रहते की.. बेटा इतना गुस्सा ठीक नहीं हैं .. थोडा दिमाग ठंडा रखा कर..
काफी दिनों से वह मोटर साइकिल की जिद कर रहा था .. पिताजी एक मामूली सी ऑफिस में क्लेर्क की नौकरी करते थे… इसलिए थोडा मुश्किल था..
वह रोज़ आकर पिता से बहस करता.. पिताजी की तबियत ठीक नहीं रहती थी इसलिए ज्यादा नहीं बोल पाते थे..
फिर एक दिन वह शाम को कॉलेज से घर लौटा, कोई दोस्त उससे अपनी मोटर साइकिल पर घर तक छोड़ने आया था.
“देखा पिताजी… मेरे हर एक दोस्त के पास मोटर साइकिल है” आज बहुत गुस्से में था वह . खाना भी नहीं खाया…..
माँ ने बहुत पूछा, पर किसी की कहाँ सुनने वाला था वह… बहुत गुस्से वाला था.
देर शाम.. माँ ने चुपके से पिताजी के पास आकर कहा, ” कब तक टालते रहोगे ?” कितने महीनों से जिद कर रहा है , ला दो ना इसे मोटर साइकिल” .
पिता ने कुछ कहा नहीं , बस मुड़ कर एक बार माँ की आँखों में देखा , बस फिर आगे कुछ बात नहीं हुई. कुछ बातें शायद कहीं नहीं जाती सिर्फ समझ ली जाती हैं ..
.
पिता रात भर सोचते सोचते सो गया , रोज़ की तरह फिर सीने में हल्का हल्का दर्द था.
.
अगले दिन ऑफिस जाकर उसने लोन के बारे पता किया , पत्नी की आँखों में उसने बहुत कुछ देखा था कल.
.
शाम तक लोन के कागज़ भर दिए, अगले दिन उससे पुरे लोन के पैसे मिलने वाले थे.
.
वह शाम को घर पहुंचा , पत्नी को बताया की इंतज़ाम हो गया है लोन का… और कल वोह मोटर साइकिल ले आएगा
.
बेटा घर आया , आज भी गुस्से में था , खाना जल्दी खा कर सो गया था.
.
पत्नी कुछ घबराई हुई आज , पिता ने ठीक से खाना नहीं खाया था आज, “लोन में तकलीफ तो नहीं होगी ना”.
.
पिता ने करवट बदली और पीठ पत्नी की तरफ करते हुए कहा ” नहीं , कोई तकलीफ नहीं होगी “. फिर कोई बात नहीं हुई…..
.
अगले दिन शाम को मोटर साइकिल घर पर थी, माँ दुप्पटे से सीट पोंछती हुई मोटर साइकिल को निहार रही थी… शाम होने वाली थी, बस बेटा घर पहुँचता ही होगा..
.
पिता के चेहरे पर कुछ भाव नहीं थे. .. आज कुछ ठीक नहीं लग रहा था उसे .. वह कुर्सी पर बैठा हुआ था.. शांत था ..
.
बेटा घर लौटा , और मोटर साइकिल देखते ही ख़ुशी से पागल हो गया .. ना पिता की तरफ देखा ना माँ की तरफ.. सीधा मोटर साइकिल पर बैठ गया..
.
“अभी पप्पू को दिखा कर आता हूँ … ” उसने मोटर साइकिल शुरू की और घर से बाहर निकल गया ” ..
.
माँ बाप अब तक एक दुसरे का देख रहे थे.. माँ ने हल्की सी मुस्कराहट के साथ कहा “बहुत खुश है ..”
.
वह मोटर साइकिल को तेज़ी से चलाता हुआ घर से काफी दूर निकल चूका था…
.
तभी सामने से एक लाल रंग की मारुती वेन उससे टकराते टकराते बची… उस से कुछ दूर ही ब्रेक लगा कर रुकी..
.
उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया , उसने गाडी साइड में लगाई और सीधा उस मारुती वेन के ड्राईवर का गिरेबान पकड़ कर बाहर निकाला .. बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था उसे..
.
जब तक पूरा गुस्सा नहीं उतरा उसने उस लाल मारुती के ड्राईवर को छोड़ा नहीं , करीब आधे घंटे की गाली गलोच और हाथापाई के बाद ही थोड़ी शान्ति हुई.. और फिर वह पप्पू के घर की और निकल गया..
.
शाम को जब वापस लौटा तो देखा की घर पर बहुत भीड़ लगी थी.. वो समझ नहीं पाया की हुआ क्या है…
.
घर के बाहर ही मोटर साइकिल लगाई और घर में चला गया.. पिता जी दम तोड़ चुके थे…. माँ कहीं नज़र नहीं आ रहीं थी… औरतों ने उन्हें घेर रखा था…
.
किसी ने उससे बताया की .. दिल का दौरा पड़ा था पिता जी को… किसी ने शहर से गाड़ी भी मंगाई थी फ़ोन कर के….
.
पर गाडी पहुँचने से पहले ही… .. पिता जी दम तोड़ चुके थे. लाल रंग की मारुती वेन थी…. समय पर नहीं पहुंची…
.
वह आजकल शांत शांत ही रहता है… मोटर साइकिल भी अक्सर घर पर ही खडी रहती है…..
.
हम अपने गुस्से में सब कुछ भूल जाते हैं। बच्चों को समझना चाहिए कि माँ बाप अपनी हैसियत से ज्यादा बच्चों के लिये करते हैं ।
.
उनकी इच्छाये उनके कहने से पहले पूरी करते हैं क्या बच्चों का कोई फर्ज नहीं होता कि वो भी अपने पेरेंट्स को समझे ....
.
और कोई ऐसी जिद न करे जो वो पूरी नहीं कर सकते क्योंकि लाइफ में प्यार जरूरी होता हैं पैसा नहीं ।
माना पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता हैं पर जो लोग चले जाते हैं वो कभी वापस नहीं आते । बस रह जाता हैं कभी न खत्म होने वाला दर्द…….

Comments
Post a Comment